
क्यो गरब करे मन मूरख तु,
जग छोङ के एक दिन जाना है,
करले कुछ सुकृत जीवन मे,
ये दुनिया मुसाफिर खाना है,
क्यो गरब करे मन मूरख तु टेर
पांच तत्व का बना पींजरा,
जिसमे एक पंछी बेठा ,
हरदम लग रहा आना जाना,
कभी किसी ने नही देखा ,
इस तन को मल-मल कर धोया,
साबुन ओर तेल लगाकर के,
पर मन का मेल नही धोया कभी,
राम का नाम जंपा कर के,
पत्थर चुनकर महल बनाया,
दो दिन का ठोर ठिकाना है,
उठ जाएगी डोली तेरी,
आखिर शमसान ठीकाना है ,
शुभ कर्म करे तो चमन खिले,
वरना जीवन वीराना है,
कहे सदानन्द दुनियां वालो,
फिर आखिर मे पछताना है
1. ‘क्यों गरब करे मन मूरख तू’ भजन का क्या संदेश है?
उत्तर: यह भजन अहंकार त्यागने और जीवन को गंगा माँ की कृपा से शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।
2. यह भजन किस देवता या देवी को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन माँ गंगा को समर्पित है, जो सनातन धर्म में मोक्षदायिनी और पाप हरने वाली मानी जाती हैं।
3. इस भजन को कब गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन आमतौर पर गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी, हरिद्वार स्नान, या सामान्य भक्ति कार्यक्रमों में गाया जाता है।
4. क्या इस भजन में आध्यात्मिक गहराई है?
उत्तर: हां, यह भजन आत्मज्ञान, विनम्रता और माया के बंधनों से मुक्त होने का आध्यात्मिक संदेश देता है।
5. क्या यह भजन यूट्यूब पर उपलब्ध है?
उत्तर: हां, इस भजन के कई वर्जन भिन्न-भिन्न भजन गायकों द्वारा यूट्यूब पर गाए गए हैं, जैसे कि अनूप जलोटा, हंसराज रघुवंशी, आदि।
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