
गौरां ज़रा भोले को समझाना
धुन- दीदी तेरा देवर दीवाना
भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥
ना पानी, की कमी है, ना दूध, की कमी है ।
तो गंगा, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
समझाया तो, फिर भी, ना माना ।
ना चंदन, की कमी है, ना केसर, की कमी है ॥
तो चन्दा, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
ना फूलों, की कमी है, न माला, की कमी है ॥
तो नाग़, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
ना भोजन, की कमी है, ना भोगों, की कमी है ॥
तो भांग, धतूरे की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
ना महलों, की कमी है, ना मंदिर, की कमी है ॥
तो पर्वत, पे रहने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
ना पाउडर, की कमी है, ना लोशन, की कमी है ॥
तो भस्म, रमाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥
बम बम भोले
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