
जपले माला सांझ सवेरे एक माला हरि नाम की
जपले माला सांझ सवेरे,
एक माला हरि नाम की,
जिस माला में हरि का भजन नहीं,
वह माला किस काम की।।
राम के बल से हनुमान ने,
सागर शीला तिराई जी,
शक्तिबाण लगो लक्ष्मण के,
बुटी लाय पिलाई जी,
राम के बल पर अंगद ने रे,
रावण को ललकारा जी,
भरी सभा में जाकर उन्होंने,
अपना पांव जमाया जी,
एक माला भाई मैया जानकी,
हनुमान को दान की,
तोड़ तोड़ कर उस माला को,
भूमि पर वो डाल दी,
सीना फाड़ दिखा दिया जी,
मुरत सीताराम की,
भगति हो तो हनुमत जैसी,
सीता की सुध लायो जी,
तुलसी दास आस रघुवर की,
हरख हरख गुण गायो जी,
गायक – महावीर जी राजपुरोहित।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा।
यह भी देखे – हरी नाम की माला जपले।
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