
जली है ज्योत जगमग,
अवध नगर में,
अवध नगर में हाँ,
जली है जोत जग मग,
देखे – अवध में छाई ख़ुशी की बेला।
कनक भवन मणि दीप की माला,
दीप की माला दीप की माला,
आज पधारे है कौशल्या लाला,
कौशल्या लाला कौशल्या लाला,
पुरे है चौक गजमोती,
डगर डगर में,
पथ में सुवासित कुसुम की कलियाँ,
कुसुम की कलियाँ कुसुम की कलियाँ,
कदली कलश है गलिया गलिया,
गलिया गालिया गलिया गलिया,
भरे है दृग बिंदु,
नजर नजर में,
आज मनावत गौरी दिवाली,
गौरी दिवाली गौरी दिवाली,
नृत्य करत है दे दे ताली,
दे दे ताली दे दे ताली,
विभोर मन ‘शिकारी’,
सिया रघुपुर में,
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