
जिस सुख की चाहत में तू
जिस सुख की चाहत में तू,
दर दर को भटकता है,
वो श्याम के मंदिर में,
दिन रात बरसता है,
अनमोल है हरपल,
तेरी जिंदगानी का,
कब अंत हो जाए,
तेरी कहानी का,
जिस पावन गंगाजल से,
जीवन ये सुधरता है,
जैसे भरा पानी,
सागर में खारा है,
वैसे भरा दुःख से,
जीवन हमारा है,
जिस अमृत को पिने को,
संसार तरसता है,
ना कर भरोसा तू,
‘सोनू’ दीवाने पर,
तू देख ले जाकर,
इसके ठिकाने पर,
वो सावन जो धरती की,
तक़दीर बदलता है,
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