
जे तू फड़दी न साडी बांह असा रुल जाना सी,
हे मेहरा/ज्योता वाली माँ असा रुल जाना सी,
जे तू फडदी ना साडी बांह असा रुल जाना सी,
मावा बिना बचिया नु कोई न संम्बालदा,
किसे दा वी प्यार नहियो तेरे प्यार नाल दा,
जे तू गल सहनु लाउंदी न असा रुल जाना सी,
जे तू फड़दी न साडी बांह ........
होर कौन खिचदा प्न्गुड़े दियां डोरिया ,
तेरे सिवा सहनु माँ सुनाउन्दा कौन लोरियां,
जे ममता दी मिलदी न छा असा रुल जाना सी,
साडे सिर मेहरा दा दुपटा जे ना तानदी,
मार निर्दोशा ने सी झलनी जहां दी
जे जपदे न तेरा नाम असा रुल जाना सी,
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