
तेरा जब संकट काटूंगी मने पहले चाहिए भोग रे
तेरा जब संकट काटूंगी,
मने पहले चाहिए भोग रे,
मैंने पहले चाहिए भोग रे,
तेरा जब काटूंगी रोग रे,
मरघट से खाकर चालू हूं,
पहला खप्पर भरवालू हूं,
जिव्ह्या पर खून रचालयूं,
जब करती चालू भोग रे,
जो जैसी भेंट चढ़ावे,
वह वैसा काम करवावे,
मने मदिरा जीव दिखावे,
ये स्याने भोले लोग रे,
तू ईसा मस्ती में टुल्या,
मेरा पान और पेड़ा भुलया,
तू हांडे फूल्या फुल्या,
मेरा कीत से काला डोग रे,
तेरी जली जोत पे आई,
और के चावे अन्यायि,
मेरी भेंट तलक ना लाई,
तेरे सारे मेटे शोक रे,
तेरी कहे तो गर्दन तोडूं,
ना कहे रास्ता मोडू,
अशोक भगत ना छोडू,
के मने रिझाबे योग रे,
गायक – नरेंद्र कौशिक।
प्रेषक – दानवीर वत्स।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


