
नाथजी री अवलुडी में,
कलपे कालजियों,
ओतो दर्शन ने तडपे दौनु नैन,
सिरेमंदर जावुला,
म्हारा रोम रोम होग्या नैन,
शान्तिनाथजी म्हारे हिवडे में बसिया,
संत सु सिमरण करु सांसो में बसिया,
ओ ज्योरा मिसरी सु मिठा लागे नैन,
दर्शन ने तडपे दौनु नैन,
पीरजी री अवलुडी में,
ओ तो दर्शन ने तडपे दौनु नैन,
लाखों लोग गुरुजी रा दर्शन ने आवे,
मन वंचित फल वे नर पावे,
म्हारी पीरजी री भक्तोली में,
अलख समाधियों गुरुदेव बिराजे,
सब भक्तों रा पीरजी कारज साजे,
ज्योरा ओमकार गुंजे सारी रेण,
लिखे जोरावर भजन भाव सु,
रविन्द्र भजन गावे साव सु,
म्हारा पीरजी ने केजो म्हारी चैण,
प्रेषक – मदनसिंह जोरावत बागरा
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