
( केवट ने जब प्रभु श्रीराम को,
नाव से नदी के पार किया,
उतराई जब प्रभु देने लगे,
उसने इंकार किया। )
प्रभु मैंने तुम्हे पार किया,
तुम मोहे पार करो,
अपने चरणों की धूलि से,
मेरा उद्धार करो,
आप तो अंतर्यामी हो प्रभु जी,
मैं गरीब केवट हूँ,
धन धन भाग हमारे है जो,
आपके इतने निकट हूँ,
अपने चरणों में मेरा,
वंदन स्वीकार करो,
आप ने कितने दीन दुखी,
पीड़ित को तारा है,
निर्धन असहायों के भी,
तो भाग्य संवारा है,
नहीं चाहिए अन्न धन सोना,
बस बेड़ा पार करो,
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