
बढ़ाई तू मत कर मन में गेला,
दोहा – ये जिन्दगी जब तक रहेगी,
फुरसत न होगी काम से,
कुछ समय ऐसा निकालो,
ए प्राणी प्रेम करलो भगवान से।
तोड पुण्य की पाल जोडे पाप ने,
साला निवत जिमाय धका दे बाप ने,
करे नार की भीड गाल दे बहन ने,
ए बाजिन्द वो नर नरका जाय,
ठोर न रेण मे।
समय भोम चुप जाय,
समय फिर रेण बसावे,
बडे बढाई न करे,
बडे न बोले बोल,
हिरा मुख सु कब कहे,
लाख टका मेरो मोल।
अरे थारा पछे हाल काई वेला,
अरे करी रे बढाई कई नर मरीया,
देख थारा सु पहला,
करी रे बढाई कई नर मरीया,
अरे कुम्भकर्ण रावण ने देखो,
कुम्भकर्ण रावण ने देखो,
अरे वही हाल थारे वेला,
अरे वाणी बोल ओ हियो भरमावे,
खुद माया मे वेला,
नर खुद माया मे वेला,
अरे स्वर्गा री पेढी है अलगी,
स्वर्गा री पेढी है अलगी,
अरे नरका मे तू पडेला,
अरे आटी मूंछ घणा नर राखे,
मन मे बन जावे चेला,
आटी मूंछ घणा नर राखे,
राम नाम री काट करे वो,
यम जूतो री वटे देला ओ,
अरे अजे थके तू चेतले बन्दा,
अरे होजा असली रा चेला,
अजे थके तू चेतले बन्दा,
होजा असली रा चेला,
“रामनिवास” शरण सतगुरु री,
अरे नित उठ दे रयो हेला,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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