
चिंता करे बलाये हमारी इस माया जंजाल की,
बलिहारी बलिहारी बोलो दशरथ नंदन लाल की,
जिस मालिक ने जनम दिया है अन्न वस्त्र भी देवेगा,
सर ढकने को छत भी देवेगा खबर हमारी लेवेगा,
भजन करो निर्भय हो चिंता, छोड़ो रोटी दाल की,
भजन करो निर्भय हो छोड़ो चिंता रोटी दाल की,
होगा भाग्य से मिलेगा चाहे घर में हो या बाहर हो,
भाग्य बिना कोई भोग ना पावे तीली हो या नाहर हो,
शांत रहो हर हाल में तुम और शरण रहो गोपाल की,
भिक्षु यति कहे इस काया से तुम ममता का त्याग करो,
एक दिन जलकर राख बनेगी कभी ना इसमें राग करो,
गोरी हो या काली हो पर चादर है ये खाल की,
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