
बैठ नजदीक तू मेरी माँ के,
हर कड़ी दिल की जुड़ने लगेगी,
देख नजरो से नजरे मिला के,
तुझसे बाते वो करने लगेगी।।
तर्ज – इतनी शक्ति हमें देना।
ये है भूखी तेरी भावना की,
ये है प्यासी तेरे प्रेम रस की,
नंगे पैरो ही दौड़ी वो आती,
अपने भक्तो को दिल में माँ रखती,
प्रेम जितना तू इससे बढ़ाए,
उतना तेरी तरफ ये बढ़ेगी,
पास में बैठ कर मेरी माँ के,
अपने दिल की हकीकत सुनाओ,
एक टक तुम छवि को निहारो,
कोई प्यारा भजन तुम सुनाओ,
भाव जागेंगे तेरे ह्रदय में,
मन की हर एक कली खिल उठेगी,
होगी आँखों ही आँखों में बातें,
खूब समझोगे माँ के इशारे,
देगी निर्देश तुझको ये मैया,
बनते जाओगे तुम इसके प्यारे,
इसके कहने पे जब तुम चलोगे,
सारी दुनिया में इज्जत बढ़ेगी,
मैया से प्यार जिसने किया है,
स्वाद जीवन का उसने लिया है,
जिसने नजदीकियां है बढ़ाई,
उसने मस्ती का प्याला पिया है,
इनके चरणों में आकर लिपट जा,
जिंदगानी महकने लगेगी,
स्वर – राजू मेहरा जी।
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