
भटके हुए को बाबा,
तू राह दिखाएं,
दुनिया के जो ठुकराए,
उनको गले लगाए,
गम के है जो मारे,
दुनिया से जो हारे,
करके कृपा बाबा,
उन्हें जीताये तू,
मुझ पर नजर कर दी,
हो बाबा झोली मेरी भर दी,
बाबा जग ने कदर कर दी।।
तर्ज – तेरी झलक।
दुनिया से क्या मांगे,
मांगे बाबा तुझसे,
खुशियां कैसे आती है,
पूछे सब मुझसे,
सजदे में झुकता सर,
तेरे ही आगे,
तेरी कृपा से दुख,
जीवन से भागे,
खाटू कि तू शान है बाबा,
भक्तों की पहचान है बाबा,
तेरे नाम से शुरु करी वह,
भक्ति रंग लाई,
तूने नजर कर दी,
होने लगी है दुखों से दूरी,
अब ना सताती है,
कोई मजबूरी,
कान्हा के रूप में,
वो खाटू वाला,
मन की मुरादे मेरी,
करता है पूरी,
‘मंत्री’ पर है उसकी निगाहें,
‘जयंत’ को दिखलाता राहे,
सारे भक्तों के दुख में,
काम वही आए,
गायक – द्वारका मंत्री।
लेखन – जयंत सांखला।
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