
मैंने पूछा श्याम धणी से कब दर पे बुलाओगे
मैंने पूछा श्याम धणी से,
कब दर पे बुलाओगे,
तेरे दर्शन का प्यासा,
कब दर्श दिखाओगे,
तर्ज – सिंदूर चढाने से।
तेरी महिमा के चर्चे,
मैंने खूब सुने सबसे,
तेरे दर पे आने को,
हम तरस रहे कब से,
तुम इतना बता दो हमको,
क्या यूँ ही तरसाओगे,
तुम भक्तो से बाबा,
बड़ा प्रेम करते हो,
जो आते दर तेरे,
उनकी सब सुनते हो,
बस इतना ही पूछ रहा हूँ,
कब तक आजमाओगे,
‘रूबी रिधम’ की विनती पे,
कुछ गौर करो सरकार,
हम तेरे प्रेमी है,
क्यों करते हो इंकार,
इतना भरोसा हमको,
तुम्ही पार लगाओगे,
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