
राधा रानी दया करके बरसाना बसा लेना
राधा रानी दया करके,
बरसाना बसा लेना,
चरणों में श्यामाजू,
थोड़ी सी जगह देना,
संसारिक दौलत की,
मुझे कुछ भी चाह नही,
शौहरत और जन्नत की,
कोई परवाह नही,
दो बूंदे रहमत की,
मुझ पर बरसा देना,
भटके हुऐ भगतों का,
विश्वास तुम्ही तो हो,
‘पागल’ जैसे रसिकों की,
ईक आस तुम्ही तो हो,
चरणों से लगाकर के,
जो चाहे सजा देना,
तेरी याद ने श्यामाजू,
मुझे कितना रुलाया है,
जग ढूंढ लिया सारा,
कहीं चैन ना पाया है,
‘मामा’ को चौखट का,
कुत्ता ही बना लेना,
– गायक एवं प्रेषक –
रसिक पागल मामा।
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