
लेके हाथों में निशान दर पे आया पहली बार
लेके हाथों में निशान,
दर पे आया पहली बार,
खाटू वाले से अपनी,
मुलाक़ात हो गई,
तर्ज – लेके पहला पहला।
मैंने सुना था बाबा,
हारे का सहारा है,
हर कोई हक़ से कहता,
श्याम हमारा है,
मानी मैंने भी ये बात,
खाटू वाला सबके साथ,
पहली बारी में मेरी भी,
बात बन गई
सपनो में दीखता अब तो,
मुझे खाटू धाम है,
हाथों की लकीरें बदले,
ऐसा बाबा श्याम है,
दिल में बस गया श्याम का नाम,
जपता सुबह और शाम,
अब तो मुझको भी बाबा,
ये आदत हो गई,
कैसे ना भरोसा करूँ,
मैं अपने श्याम पे,
आज हूँ मैं जो कुछ भी हूँ,
श्याम तेरे नाम से,
मेरे जीवन की पहचान,
बन गया खाटू वाला श्याम,
‘आरती शर्मा’ भी श्याम के,
भजनों में खो गई,
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