
सब यही पड़ा रह जाएगा
हरि, राम, नाम, संग जाएगा ॥
चाहे, कितने भी, बाग़ लगा ले ॥
एक, पत्ता भी, संग, नहीं जाएगा,
चाहे, कितने भी, ताल खुदवा ले ॥
एक, बूंद, नहीं, ले जाएगा,
चाहे, कितने भी, महल बना ले ॥
एक, पत्थर भी, संग, नहीं जाएगा,
चाहे, कितनी भी, माया जोड़ लें ॥
एक, रूपया भी, संग, नहीं जाएगा,
चाहे, कितने भी, गहने बना ले ॥
एक, रत्ती भी, संग, नहीं जाएगा,
चाहे, कितनी भी, काया सँवार ले ॥
सब, मिट्टी, में ही, मिल जाएगा,
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