
सबकी बिगड़ी बनाते हो हारों को जिताते हो
सबकी बिगड़ी बनाते हो,
हारों को जिताते हो,
देखो हमें भी बाबा हारे हैं हम,
आ भी जाओ वरना रो देंगे हम।।
अधबीच नैया ओ रे कन्हैया,
भटक कहीं ना जाएँ,
खेते खेते हार गए हम,
क्यों ना पार लगाए,
तेरा एक सहारा है,
तू ही एक हमारा है,
तुझको ही जाना है जबसे हैं हम,
तेरे दर पे कबसे खड़े है,
आस का दीप जलाये,
छूट ना जाए धीरज मन का,
क्यों तू देर लगाए,
उलझा ये सारा जीवन,
सुलझाओ अब तो उलझन,
ये उम्मीदें लेके जीते हर दम,
सबकी झोली तू भरता है,
बिगड़ी हुई तू बनाये,
तेरी दया की धारा बहती,
हम तक क्यों ना आये,
एक नज़र जो कर दो तुम,
थम जायेंगे सारे गम,
हंसने लगेगा ‘गोलू’ सारा जीवन,
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