
ये बस्ती श्याम दीवानों की,
यहां हार नहीं अरमानों की,
साथी सबके श्याम है यहाँ,
करते सबके काम है यहां।।
तर्ज – तू पागल प्रेमी आवारा।
कलयुग के राजा का देखो,
आंगन ये अलबेला,
श्याम दीवानों का लगता है,
रोज यहां पर मेला,
ये बस्ती श्याम की बस्ती है,
यहां खुशियां रोज़ बरसती है,
मन के धागों से बांधों और,
श्याम से नाता जोड़ो,
श्याम के होकर जी लो दर दर,
ठोकर खाना छोड़ो,
सुख चैन है श्याम की राहों में,
यहां भक्त है श्याम निगाहों में,
तेरे मंदिर में जलती है,
ज्योत भी गजब निराली,
चीर के हर अंधियारे गम के,
फैलाती खुशहाली,
जहां धूल भी बरकत बन जाती,
किस्मत भक्तों की चमकाती,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


