
हरी अनंत हरी कथा अनंता,
प्रभु से साँचा प्रभु का नाम,
सच्चे मन से नाम प्रभु का,
जपलो पूरण होंगे काम,
हरी अनन्त हरी कथा अनंता,
तर्ज – कस्मे वादे प्यार।
जब भी आती विपदा कोई,
दुःख हो मन घबराता है,
लाखों जतन करे फिर भी जब,
काम नहीं बन पाता है,
तब यही नाम प्रभु का बन्दे,
देता है मन को आराम,
है सुख सारे फिर भी जिसको,
मन का सुख नहीं मिलता है,
नाम प्रभु का जपके देखो,
कैसे मन ये बदलता है,
प्रभु वंदन से मन की भटकन,
को मिल जाता है विश्राम,
मोह माया में खोकर सबकुछ,
तब ये समझ में आता है,
अंत में ही सबको मेरे प्यारे,
प्रभ का नाम ही भाता है,
प्रभु के नाम की महिमा ‘अंकुश’,
गाता है अब सुबहो शाम,
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