
हो रही तेरी आरती,
मिनावाड़ा की दशा माँ।।
है जग जननी माँ कल्याणी,
करे आरती भक्त तुम्हारी,
द्वार तुम्हारे उतारे आरती,
मिलकर के नर और नारी,
नर और नारी,
ढोल नगाड़ा शंख बजे है,
गूंज रही शहनाई,
रुमझुम रुमझुम होबे आरती,
जग मग जग ज्योत जगाई,
माँ ज्योत जगाई,
शीश मुकुट गल मोतियन माला,
ओढे लाल चुनरियाँ,
सज धजकर माँ बैठी ऊंट पर,
दर्शन कर रही दुनियाँ,
ये दुनियाँ सारी,
व्रत उपवास करके जो तेरा,
दस दिन पूजा पड़ावे,
करके कृपा माँ उन भक्तो का,
दुख दरिद्र दूर भगावे,
माँ बिगड़ी बनावे,
कुमकुम पगले आप पधारो,
खेल रही महारानी,
दिलबर नागेश द्वार खड़े माँ,
भक्त उतारे माँ तेरी आरती,
माँ सबको तारती,
गायक – नागेश कांठा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन, म.प्र. 9907023365
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