
आप पधारो कुलदेवी,
मोटी मावड़ी जी,
बालकिया बुलावे,
थाने गिरवर राय।।
कंचन कलश थाली करश्या,
आंगन आरती जी,
मुख देख्या सुख,
अति आनंद समाय,
मंदिर सुन्दर थरपी,
मठ में थारी मूर्ति जी,
पावा शुभ दर्शण,
मन हर्षाय,
आओ थे ल्यावो नवलख,
सकत्या सारी साथ में जी,
काला गोरा भैरव,
रास रमाए,
चरना रै शरने अम्बे,
दिज्यो म्हाने चाकरी जी,
नित उठ करा सेवा,
ज्योत जगाए,
पिगा मां पानी समद्र,
सुख्यो सरो आंकड़ों जी,
अम्बे थारी महिमा को,
पार ना पाए,
सदा ही सुहागन रखो,
चूड़ो अमर चुंदड़ी जी,
बेटी बहु सरन मै,
आशिसा पाए,
अर्जी मां सुन के किरपा,
करज्यो थारा दास पे जी,
सूत में सुमिष्ण गुण,
नित गाय,
स्वर – कोमल कंवर अमरावत।
प्रेषक – सुनील देव भार्गव।
रिदमलसर 9509429444
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