
तेरा नहीं रे जगत में कोई,
या दुनिया सारी मतलब की।।
मोह माया के जाल में फसके,
क्यों तू वक्त गंवाए,
जिनके कारण फिरे भरम का,
कोई काम ना आवे,
तेरा कोई ना दीवाने बन्दे होए,
मात पिता सुन बंधू सारे,
मतलब के है यार,
अपने मतलब के कारण प्रिया,
करती तुमसे प्यार,
तू क्यों रहा रे नींद में सोय,
झूठे जग से प्रीत लगाई,
सच्ची राह त्याग,
गफलत में तू क्यों पड़ सोया,
मुरख अब तो जाग,
अपना पापों में जीवन खोय,
सत्य नाम का सुमिरण करले,
मन के मेल मिटाए,
उसके नाम के सुमिरण से तेरी,
बिगड़ी बनती जाए,
सारे दाग दिलों के तू धोय,
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