
बाबा श्याम की नज़र का,
हुआ है करम,
मिला दिल को सुकून,
हुए दूर सारे गम,
मेरी खुशी का ठिकाना,
मेरे श्याम के चरण,
बाबा श्याम की नजर का,
तर्ज – मेरे प्यार की उमर हो इतनी।
मैं तो कुछ भी कहूं ना,
अपने दिल की अर्जिया,
है चलती मेरे उपर तो,
इनकी ही मर्जियाँ,
सच कहता हूँ बात ये,
ख़ाके मैं कसम,
बिन बाबा एक पल भी,
अब तो रहा नही जाए,
दूर रहना बाबा से,
अब सहा नहीं जाए,
सांवरे के ही दर पे तो,
निकलेगा दम,
मेरे छोटे से घर में,
श्याम का आशियाँ,
कोई परदा नही है,
दोनो के दरमियाँ,
‘चोखनी’ को बाबा कभी,
देते नही कम.
‘शैलेंद्र’ को बाबा कभी,
स्वर – शैलेन्द्र सचदेवा।
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