
बीती जाए रे उमरिया,
भजन बिना,
हरि भजन बिना,
प्रभु भजन बिना,
बीती जाये रे उमरिया,
बालापन खेलन में खोयो,
कियो बड़ी नादानी,
आई जवानी की मनमानी,
चाल चले मस्तानी,
सीधी चले ना डगरिया,
मनचाही शादी कर बेटा,
बहु ब्याह कर लाए,
हाथ पकड़ के चले अकड़ के,
कुल मर्यादा गवाए,
घूमे शहर और बजरिया,
चंद रोज में बेटा बेटी,
ससुर दामाद कहाए,
बेटा से बन गए बाप,
अब बाबा का नंबर आए,
झुक गई बाबा की कमरिया,
एक दिन राम नाम सत हो गया,
हो गई खत्म कहानी,
सगे संबंधी रोए बाबा,
बोल सके ना वाणी,
बंद हो गई रे नजरिया,
स्वर – संत श्री सुरेशानंदजी।
प्रेषक – आशीष कुमरावत
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