Skip to content

मान कयो मोट्यार गुर्जर का भाया देवनारायण कथा भाग चार

20
॥ श्री ॥

मान कयो मोट्यार,

गुर्जर का भाया,

मरघट पर रहयो माया,

भिडकेली थारी गाया,

मत न तू ढेरा दे मसान मे,

अरे मान कयों मोट्यार,

अरे चिता धनके मुंदी फबके,

भोजन कैया भासी रे,

नवल बन्नी पे सुन्दर सागे,

पेटुडी हो जासी रे,

जिद करनो नी साचो भाया,

कोई लाभ उठासी रे,

होनी अनहोनी होसी,

पाछे तू पछतासी रे,

मसाना डर नित मानो,

मुश्किल हो जासी जिनो,

भमे अटे भूत ने वेताल रे,

इन भोम माथे आधीराता,

भूत भूतनीया नाचेला,

ऊंट लडे भैंसा भीडे,

महाभारत रात रचेला,

रातन सारी सिकोदरीया के,

साथे मेलो जोर रे,

आता जाता लोग सुने है,

मसाना मे जोर रे,

जो भी आधीरात मे आया,

गाबड तोड गिराया,

सगला समझावे केनो मानले,

साडू माँ समझावा लागी,

देव कला दर्शायी रे,

मसाना मे बाग लगायो,

फुलडा छोर बझाड रे,

हरी भरी ध्रोप उगादी,

गाया बछडा चर रया,

राजी राजी पशु आपरो,

पेट खुशी सु भर रया,

मेवा फल रूक लगाया,

दाडम ओर दाकर छाया,

पंछीडा मधुरा मधुरा गाया रे,

कामदार चितौड़गढ़ रा,

सांग देवजी सेठ रे,

हुई रात्रि सुरपुर पुग्या,

जमडा म्हारी पेट रे,

रोवा कुका घर में मचीयो,

किरीया क्रम की तैयारी रे,

वैकुण्ठ गाढन रे खातीर,

सुरपुर बात चले न्यारी,

गाढो लकडा को आयो,

बाग मसाना छायो,

बात समझ नहीं आय रे,

बाग बगीचा देख मसाना,

चकमक वे चकराया रे,

सेठा घर पाछा जाकर,

सब समाचार सुनाया रे,

हक्का बक्का होवन लागा,

सुनके लोग समाज जी,

पति व्रता पत्नी जद सुन,

सिवरीया हरि ने रात जी,

सुनके सेठा लुगाई,

सतवंती जेतु बाई,

दौडी शरन मे आयी देव के,

देव धणी चरन कमल मे,

जेतु धोक लगावे है,

जुड चुनडी चिरंजीव,

देव आशीष दिरावे रे,

वचन देव का सुनके जेतु,

नैना नीर बहावे है,

काड कफा रो कालजीया रो,

चरना मे गिर जाय जी,

बोली रे जेतु बाई,

सुहाग खपन रे माई,

रखो वचन की प्रभु लाज रे,

देव मंगाई लाश सेठ की,

दियो संजीवन पाय रे,

सांग देवजी उठ्या सीडी सु,

छायो हरखत छाव रे,

देव चरन मे गिर गया,

सारा जय जयकार लगाय रे,

दर्श देव का करके सारा,

अपनो भाग सराया रे,

गुंज्या जयकारा जबर,

गुंज्यो चितौड़ नगर,

कोप्या सिसोदिया महाराण रे,

उजीज पाखंडी गुर्जर ने,

को सेनिका जाय के,

पकड़ जेल में बंद कर देवो,

हथकडीया लगवाय के,

सौ सौ सैनिक साथ टोली मे,

देव पकडने जाय रे,

बीच बजारा बढेनी आगे,

घट देता गुढ जाय रे,

पुग नी पावे सैनिक,

मार्ग में मरगा एक एक,

गिनती लागी रे साढे सात सौ,

हाथ लगा खुद के हथकडीया,

भूप चितौड़ का आया जी,

माफ़ करो प्रभु देवजी थे,

सिमटो थारी माया जी,

भूल करी मै प्रभु जी भारी,

मती बिगड़ गई म्हारी जी,

शरणागत की सहाय करावो,

आप बडा उपकारी जी,

महिमा नी जानी थारी,

भूल करी मै भारी,

दया विचारों मेरा नाथ रे,

पाव पड्या चितौड़ पती जद,

दया देव दर्शावे रे,

सारा सैनिक जीवित करके,

संजीवन छिडकावे है,

सांझ सुरंगा बाजन लागा,

देव जगत का राजा रे,

बैठ चितौड़ सिंहासन पे,

किना पिसन काजा रे,

उच्छव कर राजा ध्यावे,

सिंहासन लाय बैठावे,

गढ मे चुनायो मिन्दर देव को,

सारा सैनिक नाचे गावे,

बोले जय जयकार जी,

भाव प्रेम का भूखा भगवन,

पूजा करे स्वीकार रे,

स्वर्ग लोक सु इन्द्र राजा,

फुलडा बरसा रया,

देव देवा के देख छवी,

किरत देव की गाय रया,

अजब है हरि की माया,

पार न कोई पाया,

अजर अमर उपकार रे,

धर्म बाई कहके जेतु ने,

देव धणी बतलायी रे,

धर्म बहन कहके जेतु ने,

भात भरने देव जद,

प्रभु आशीष दिरावे रे,

बडा दयालु देव नारायण,

भगता रा इतकारी रे,

नारद शारद करे नासकी,

देव की महिमा भारी रे,

साचो नारायण सेवा,

मनचा यहाँ पावो मेवा,

विनती करणीसुत बारम्बार,

साचे मनसु अरजी किनी,

महारणा चितौड़ रे,

राज सिंहासन बैठ के देवा,

पावन करदी भोम रे,

देव धणी तब सुने प्रार्थना,

सदा करे स्वीकार रे,

गढ चितौड़ मन्दिर थरप्यो,

मेवाडी दरबार रे,

नारायण लीलाधारी,

जिनरी है महिमा भारी,

छायो सुजस संसार रे,

गायक – प्रकाश मालीजी नीताजी नायक।

प्रेषक – मनीष सीरवी।

(रायपुर जिला पाली राजस्थान)

॥ जय हो ॥

हिंदी · Read on Bhajan Baan

Share this bhajan with your family

Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

Sponsored
Devotional partner
Advertisement

About this bhajan

Meaning, tradition and how to sing it

मान कयो मोट्यार गुर्जर का भाया देवनारायण कथा भाग चार is a bhajan dedicated to Krishna Ji, sung in homes, temples, and community sabhas across India.

The bhajan opens with the line "Maan kyo motyar,", a verse devotees often recite while lighting the evening lamp or gathering for kirtan.

On this page you can read the complete lyrics in Hindi (Devanagari), Hinglish (Roman transliteration), English translation. Use the language toggle above to switch scripts, adjust the font size for comfortable reading, and save the bhajan to revisit during your next sabha or solo practice.

If you enjoy this composition, explore more bhajan bhajans below. Each one is curated to help you build a devotional reading list that suits your tradition, mood, and occasion.

More bhajans you may like

See all