
चलता चल चलता चल,
ऊँचे पर्वत चढ़ता चल,
आने जाने वालो को,
जय माता दी करता चल,
दिन ये मुकद्दर से आया है,
मैया ने दर पे बुलाया है,
चलता चल चल चल,
ओ चलता चल चल चल,
कुछ बातें माता से कहनी है,
कुछ बातें माता कुछ बातें माता की सुननी है,
दुनिया की दाती का दीदार होगा,
पल में सुखी तेरा संसार होगा,
सृष्टि ये जिसका खेल तमाशा,
कर देगी पूरी माँ हर एक आशा,
मुश्किल चढ़ाइयों से डरना ना,
रोना ना तुम आहें भरना ना,
पर्वत पे माँ ने लगाया जो डेरा,
वो आज़माती है विश्वास तेरा,
छा जाये बादल जो काले तो क्या है,
पड़ जाये पावो में छाले तो क्या है,
ध्यान में उसके ही खो कर के,
उसके दीवाने ही हो कर के,
भक्तो के पिछले वो सब पाप धोती,
देती है वो ही मुरादों के मोती,
वो सच्ची मुंसिफ है इंसाफ करती,
भूले सवाली की सब माफ़ करती,
उसकी दुआये ही लेने को,
श्रद्धा के कुछ फूल देने को,
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