
चित्रकूट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट, राम मेरे आ जाओ
राम मेरे आ जाओ, राम मेरे आ जाओ
अपने राम जी को, " कहाँ मैं बिठाऊँ
टूटा फूटा खाट खाट पर, विछा पुराना टाट,
राम मेरे आ जाओ
अपने राम जी को, " क्या मैं खिलाऊँ
छोटे छोटे पेड़ पेड़ पर, लगे सुनहरे बेर,
अपने राम जी को, " कैसे रिझाऊँ
दीन हीन मोहे जान, ना ही कोई, भक्ति ना ही ज्ञान,
अपने राम जी के, " चरण पखारूँ
नैन से व्हे जो नीर, नीर है सुरसर जैसे तीर,
अपने राम जी को, " झूला मैं झुलाऊँ
हरे भरे हैं पेड़, पेड़ पर झूले सीता राम,
अपलोड कर्ता- अनिल रामूर्ति भोपाल बाघीओ वाले
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