
आंसुओ की लग रही धार,
लखन मोसे बोले ना,
बोले ना रे भैया बोले ना,
उठा के लखन को गोदी में रखलए,
गोदी में रखलए हाँ,
गोदी में रखलए,
तेरे कहां पे लगो हैं बाण,
हनुमंत जी लंका को जइयो,
वहां से वैध सुषेण को लईयो,
मेरे भैया की नवज बतइओ,
की लाल मेरो बोले ना,
हनुमंत जी द्रोणागिरी जईओ,
वहां से संजीवनी बूटी लईओ,
मेरे भैया को घोंट के पिलईओ,
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