
ज्योत से ज्योत जगाते चलो Jyot Se Jyot Jagate Chalo
ज्योत से ज्योत जगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी
सबको गले से लगाते चलो
जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा
प्यार के मोती प्यार के मोती लुटाते चलो
आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया का दीप दया का जलाते चलो
छाई है छाओं और अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं
धरती को धरती को स्वर्ग बनाते चलो
प्रेम की गंगा प्रेम की गंगा बहाते चलो
धरती को स्वर्ग बनाते चलो
प्रेम की गंगा प्रेम की गंगा
बृहस्पति देव की आरती
लक्ष्मी चालीसा
श्री सूर्य देव आरती
करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं
गणपति अथर्वशीर्ष
शिव ताण्डव स्तोत्र
मैली चादर ओढ़ के
कृष्णा कृष्णा है
हे मातृभूमि! हमको वर दो
एक डाल दो पंछी बैठा
तेरे द्वार खड़ा भगवान
डगर है मुश्किल
शांति मंत्र
प्रभु जी मोरे अवगुण चित ना धरो
ॐ जय जगदीश हरे
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी
गंगा किनारे
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