
आज खेलेंगे पत्तों की बाज़ी,
ओ मेरा कान्हा बड़ा है मिज़ाज़ी,
नटवर नागर नंदकिशोर,
नटखट छलिया माखनचोर।।
तर्ज – सारे जग का है वो रखवाला।
बादशाह मेरा सांवरिया,
बेगम राधा रानी है,
हम गुलाम है भक्त सभी,
करते सेवा पानी है,
जैसा भी रखना है हमको,
हम तो तेरी रजा में है राजी,
दहला दशो दिशाए है,
नहला नौनिधि लाए है,
आठ प्रहर प्रभु के कीर्तन,
सात सुरों ने गाए है,
छह ऋतुओं के राजा,
पांच तत्व की काया है,
चार वेद की माया है,
तीन लोक के स्वामी है,
सुख दुःख जिनकी छाया है,
भक्तो का एक सांवरिया,
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