
दूर उस आकाश की गहराइयों में,
एक नदी से बह रहे हैं आदियोगी।।
शून्य सन्नाटे टपकते जा रहे हैं,
मौन से सब कह रहे हैं आदियोगी।।
योग के स्पर्श से अब योगमय करना है तन मन,
साँस सास्वत सनन सनननन,
प्राण गुंजन धनन धन-धन,
उतरे मुझमे आदियोगी।।
योग धारा चलत छण छण,
पीस दो अस्तित्व मेरा,
और कर दो चूरा चूरा,
पूर्ण होने दो मुझे और,
होने दो अब पूरा पूरा,
भस्म वाली रस्म कर दो आदियोगी,
योग उत्सव रंग भर दो आदियोगी,
बज उठे यह मन सितरी,
झणन झणन झणन झणन झन झन।।
साँस सास्वत,प्राण गुंजन।।
योग धारा छलक छन छन,
एक बार जो तेरे चरण पड़े शिव भजन लिरिक्स
मेला लगया भोले दा शिव भजन
भोर भाई अब जागो भोले भक्त खड़े है द्वार पे तेरे
ओ भोले की बारात आगयी शिव भजन
उतरे मुझमे आदियोगी शिव भजन
ओ दुनिया के रखवाले भोले शंकर डमरू वाले
सुबह की पहली किरणों में शिव का रूप समाया
जागो भोले नाथ सुनो अरज हमारी
मन भोले से गौरी हार गयी रे
सदा शिव बम बम भोले बोलो रे बोलो बम बम भोले
जय जय शंकर त्रिपुरारी शिव भजन
एक लोटा जल चढ़ाओ ध्यान बस दो पल लगाओ शिव भजन
ओ भोले मेरा पापी मन डोले शिव भजन
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