
ना तो देर है ना अंधेर है,
तेरे कर्मो का ये सब फेर है,
लाखो तीरथ जाके नहाले,
मिटते नहीं कभी कर्मो के काले,
नेकी की मन में ज्योत जगा ले,
और जीवन में करले उजाले,
ना तो देर है ना अन्धेर है,
नेकी जगत में जो तू करेगा,
सर पे तेरे वो हाथ धरेगा,
मुख से ना कुछ भी कहना पड़ेगा,
बिन मांगे प्रभु घर को भरेगा,
अपना करम ही सुख देता है,
अपना करम ही दुःख देता है,
कर्म बना जीवन देता है,
कर्म मिटा जीवन देता है,
हमें ही विजय सुन चलना ना आए,
प्रभु तो सभी को चलना सिखाए,
वो तो जरा भी ना तरसाए,
हमको ही दिल से कहना ना आए,
स्वर – राकेश काला जी।
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