
सज गयो भोला संवर गयो रे
कैलाश, पर्बत पर, बस गयो रे ॥
शीश, भोले के, गंगा विराज़े ॥
गंगा से, सारा जग, तर गयो रे ॥
कैलाश, पर्बत पर, बस...
कान, भोले के, कुंडल सोहे ॥
कुंडल, में बिच्छू, लटक गयो रे ॥
गले, भोले के, माला सोहे ॥
माला, में सर्प, लटक गयो रे ॥
हाथ, भोले के, त्रिशूल विराज़े ॥
त्रिशूल, में डमरू, लटक गयो रे ॥
संग, भोले के, गौरां विराज़े ॥
गौरां की, गोदी में, गणपति रे ॥
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