
हमें आस लगी दर्शन की,
मैया प्यास बुझादो मन की,
बिन मांगे देने वाली,
फरियाद सुनो निर्धन की,
मैया चरण रज अपनी,
हमें मस्तक लगाने दो,
बदल दो किस्मत हमारी,
देके धूल चरणन की,
अपनी ममता के दो कतरे,
मैया हमपे भी बरसा दो,
निरस है यह जीवन,
करें विनती बरसन की,
करे विनती राजीव ये ही,
मुझे आस लगी दर्शन की.....
©राजीव त्यागी
नजफगढ़ नई दिल्ली
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