
खाटू गाँव में उड़ रही धुल धुल मोहे प्यारी लगे
खाटू गाँव में उड़ रही धुल,
धुल मोहे प्यारी लगे।
दोहा – खाटू के गाँव में,
बस्या म्हारा घनश्याम,
जिसकी चरण धूलि से,
बन जाता बिगड़ा काम।
प्यारी लगे मोहे प्यारी लगे,
इस धुल में दुःख गई भूल,
तर्ज – नंदभवन में उड़ रही धुल।
उड़ उड़ धूल मेरे माथे पे आ गई,
हां मैंने तिलक किए भरपूर,
उड़ उड़ धूल मेरे नैनो में आ गई,
हाँ मैंने दर्शन किए भरपूर,
उड़ उड़ धूल मेरे होंठों पे आ गई,
हां मैंने भजन किए भरपूर,
उड़ उड़ धूल मेरे हाथों में आ गई,
हां मैंने ताली बजाई भरपूर,
उड़ उड़ धूल मेरे साथ में ही आ गई,
जी मैंने श्याम मनाया भरपूर,
स्वर – कन्हैया मित्तल जी।
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